क्या है निपा वायरस ? Nipah Virus Symptons, Prevention and Treatment

Nipah Virus (एनआईवी – Niv) एक ऐसा ख़तरनाक वायरस है जिससे बचना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है| Nipah Virus ने केरल के कोझिकोड़ जिले में आतंक मचा रखा है वहां अब तक 11 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है|

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क्या है निपा वायरस?  What is Nipah Virus ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक Nipah Virus एक ऐसा वायरस है जो जानवरों से फलों के माध्यम इंसानों में फैलता है| यह इंसानों और जानवरों में लाईलाज बिमारियों को जन्म देता है|

Nipah Virus

यह वायरस हेंड्रा वायरस का मिलता-जुलता रूप है जो जो घोड़ों और इंसानों में साँस संक्रमण से फैलता है| Nipah Virus का मुख्य स्त्रोत चमगादड़ (Fruit Bat) है जो पेड़ों पर लगे फ़ल खाते है|

एसे चमगादड़ों को फ्लाइंग फॉक्स (Flying Fox) के नाम से भी जाना जाता है| खजूर की खेती करने वाले लोग इस वायरस की चपेट में बहुत जल्दी आते है|

चमगादड़ की नस्ल में पाया जाता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार यह वायरस फ़ल खाने वाले चमगादड़ों की नस्ल में पाया जाता है| यह वायरस उनके लार व मूत्र में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है|

एसे चमगादड़ जिस किसी भी फ़ल को खाते है वह Nipah Virus से संक्रमित हो जाता है| और जो कोई भी जानवर या इन्सान इन फलों को खाता है वो इस जानलेवा वायरस का शिकार हो जाता है|

कहाँ से आया निपाह वायरस?

सबसे पहले यह वायरस सन 1998 में मलेशिया के काम्पुंग सुंगई के निपाह नामक गाँव में पाया गया| इसी गाँव के नाम पर इस वायरस का नाम निपाह वायरस रखा गया| इस गाँव के ज्यादातर लोग सूअर पालन का व्यवसाय करते थे|

सूअरों द्वारा संक्रमित फ़ल खाने के कारण यह वायरस बड़ी ही तेज़ी के साथ फैला और उस गाँव में रहने वाले लोगों को इस वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया|

2001 में आया था भारत में पहला मामला

हमारे भारत देश में Nipah Virus का हमला पहले भी हो चूका है| साल 2001 में पश्चिम बंगाल राज्य के सिलीगुड़ी में इस वायरस ने लगभग 66 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था|

इन सभी संक्रमित लोगों में से 45 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी| इसके बाद Nipah Virus का दूसरा हमला साल 2007 में पश्चिम बंगाल के ही नदिया इलाके में हुआ| उस वक्त भी इस वायरस से संक्रमित होने वाले सभी पांच लोगों की मौत हो गई थी|

निपाह वायरस के लक्षण | Nipah Virus Symptoms

  • इस वायरस से संक्रमित मरीजों को देखने में तकलीफ होने लगती है| धीरे धीरे आँखों के सामने धुंधलापन छाने लगता है|
  •  रोगी को निश्चित समय अन्तराल में चक्कर आने लगते है
  • Nipah Virus सबसे पहले फेफड़ों को संक्रमित करता है जिस कारण रोगी को साँस लेने में तकलीफ होने लगती है|
  • लगातार सर में दर्द रहने लगता है|
  • Nipah Virus  से संक्रमित रोगी को तेज़ बुखार आना शुरू हो जाता है|

Nipah Virus के लक्षण दिमागी बुखार की तरह ही होते है| इस बीमारी की शुरुआत साँस लेने में दिक्कत, भयानक सिरदर्द और तेज़ बुखार से होती है| ज्यादा संक्रमण होने पर रोगी कोमा में चला जाता है|

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बचाव के उपाय | Nipah Virus Cure and Treatment:

अभी तक इस बिमारी का पूर्ण इलाज कही भी उपलब्ध नहीं है| इस से बचाव ही इस बीमारी का इलाज है|

इस बमारी से बचाव के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें|

  • जानवरों द्वारा खाई हुई फ़ल एवं सब्जियों का इस्तेमाल न करे|
  • फल-सब्जियों को अच्छी तरह धो कर खाएं|
  • संक्रमित व्यक्ति एवं जानवरों से दुरी बना कर रखे|
  • हाथ धोने के लिए हैण्ड वाश का इस्तेमाल नियमित रूप से करें|
  • घर से बाहर निकलते समय NH-95 ग्रेड या इस से उच्च क्वालिटी का मास्क जरुर पहने|
  • स्वयं एवं परिवार के सभी सदस्यों को स्वच्छ रहने के लिए प्रेरित करें|
  • घर की खिड़की-दरवाज़े जरूरत पड़ने पर ही खोले अन्यथा बंद कर के ही रखे|

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