बच्चों पर मोबाइल फ़ोन के हानिकारक प्रभाव | Disadvantage of Mobile phones

जिस दुनिया में आज हम जी रहे है वह एसी दुनिया है जिसमें चारों और सिर्फ टेक्नोलॉजी और गैजेट्स ही नजर आते है| टेक्नोलॉजी और गैजेट्स के बिना ज़िन्दगी अधूरी सी लगती है| क्योंकि हम पूरी तरह इन पर निर्भर हो चुके है| जिन दो गैजेट्स ने हमारी ज़िन्दगी को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है वह है टेलीविज़न और मोबाइल| Disadvantage of Mobile Phones

Disadvantage of Mobile Phones on Children

जब कोई व्यक्ति इन गैजेट्स का इस्तेमाल करता है तो वह एक काल्पनिक दुनिया में अपने आप को ले जाता है| एसा इसलिए होता है क्योंकि इन गैजेट्स के अन्दर की दुनिया हमें हमारी दुनिया से भी ज्यादा मनभावक लगती है|

क्या आपके साथ कभी एसा हुआ है की आपने टेलीविज़न या स्मार्टफ़ोन पर कोई गाना सुना हो और पुरे दिन आपने सिर्फ वही गाना गुनगुनाया हो?

या

आपने टेलीविज़न या स्मार्टफ़ोन पर डरावनी फिल्म या विडियो देखी हो और रात में आपको डर का एहसास हुआ हो?

या

आपने कोई एसी फिल्म या सीरियल देखी हो जिसे देखने पर आप भावुक हो गए हो और आपकी आँखों से आंसू आने लगे हो?

यह सब हम सभी के साथ कभी न कभी जरुर हुआ है| बल्कि ज्यादातर लोगों के साथ यह सब घटनाएँ आम बात है| टेलीविज़न या स्मार्टफ़ोन स्क्रीन पर हम जो कुछ भी देखते या सुनते है वो हमारे दिमाग पर सीधा असर डालता है| हम जो भी स्क्रीन पर देखते या सुनते है उसकी काल्पनिक दुनिया स्वयं हमारे दिमाग पर हावी होने लगती है|

अगर हम बड़ों के साथ सच में एसा होता है तो आप अंदाज़ा लगाइए की हमारे बच्चों पर टेलीविज़न और मोबाइल कितना ज्यादा प्रभाव डालते होंगे| हम तो फिर भी कुछ देर बाद इस काल्पनिक दुनिया से बाहर आ जाते है लेकिन क्या बच्चे इस काल्पनिक दुनिया से बाहर आ पाते है?

Disadvantage of Mobile Phones

हम सभी इस तथ्य को मानते है की बच्चों के मस्तिष्क का सबसे ज्यादा विकास 12 साल की उम्र तक होता है इन 12 सालों के दौरान बच्चे क्या देखते है, क्या सुनते है और क्या करते है इस पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरुरी है| क्योंकि इन 12 सालों के दौरान उसकी दिनचर्या ही उसका आने वाला भविष्य तय करती है|

अब सवाल यह उठता है की हमारे बच्चों को टेलीविज़न और मोबाइल की आदत लगी कैसे? इसका ज़िम्मेदार कौन है?

ऊपर दिए गए दोनों सवाल पढ़कर उनके जवाब में आपने शायद खुद को ही ज़िम्मेदार ठहराया होगा और हो सकता है की आप काफी हद तक एकदम सही भी हो| बच्चों का मन लगाने के लिए और स्वयं के लिए समय बचाने के लिए मोबाइल रुपी खिलौने हमने ही उन्हें दिए है| लेकिन क्या आप इस बात से रूबरू है की आपकी इस छोटी सी गलती ने आपके बच्चों को एक एसा भविष्य दिया है जिसमे ख़ुशी और सुकून की कोई जगह नहीं है| जाने अनजाने में आपने अपने बच्चों के लिए एसा भविष्य बना दिया जो बिमारियों, तनाव, उदासी और न्यूनता से भरा हुआ है|

मोबाइल और टेलीविज़न से बच्चों पर होने वाले प्रभाव को दो भागों में बाँट सकते है

  1. शारीरिक प्रभाव
  2. मनोवैज्ञानिक प्रभाव

Disadvantage of Mobile Phones

1. शारीरिक प्रभाव | Physiological Effect Of Mobile:

मोबाइल फ़ोन और टेलीविज़न के जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में कई तरह की नई नई बीमारियाँ जन्म ले रही है| क्या आपने ये महसूस किया है की इन दिनों बच्चे गर्दन में होने वाले दर्द से परेशान रहते है?

जब बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल करते है तो वो अपने शरीर को इस तरह रखते है की उनकी कमर और गर्दन हमेशा झुकी रहती है जिस वजह से शरीर की कोशिकाओं व मांसपेशियों में पूर्ण रूप से रक्त संचार नहीं हो पाता है जिसके फलस्वरूप बच्चों का दिमागी विकास रुक सकता है|

A. सिरदर्द की समस्या | Disadvantage of Mobile Phones:

टेलीविज़न और मोबाइल स्क्रीन एक प्रकार की नीली चमकीली लाइट का उत्सर्जन करते है जो सीधा मष्तिष्क पर असर डालती है जिसके फलस्वरूप बच्चों में सिरदर्द की समस्या शुरू हो जाती है|

ज्यादातर बच्चे सिरदर्द जैसी बिमारियों को नहीं पहचान पाते और लगातार स्क्रीन पर नज़र रखते है और अंत में जब उनका दिमाग पूरी तरह थक जाता है तो वो अचानक सो जाते है| सिरदर्द और अचानक सोने की यह प्रक्रिया बच्चों के दिमागी विकास के लिए बहुत घातक है|

B. आँखों की रौशनी का कम हो जाना | Disadvantage of Mobile Phones:

आजकल जब हम अपने आसपास देखते है तो पता लगता है की चश्मा पहनने वाले बच्चों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है| जबकि हमारे बचपन के समय एसा नहीं था| बहुत ही कम बच्चों की नाक पर चश्मा दिखाई देता था|

टेलीविज़न और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली चमकीली लाइट सीधे आँखों पर पड़ती है जो धीरे धीरे आँखों की रौशनी कम कर देती है| इसी वजह से सिरदर्द जैसी समस्याएं जन्म लेती है|

Disadvantage of Mobile Phones

C. मोटापा और दुबलापन | Disadvantage of Mobile Phones:

अमेरिकन हार्ट असोसिएशन के द्वारा ज़ारी रिपोर्ट से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये है| उनके मुताबिक दुनिया में हर तीन में से एक बच्चा शारीरिक विक्रता से ग्रसित है| एसे बच्चों में या तो बहुत ज्यादा मोटापा बढ़ रहा है या बहुत ज्यादा दुबले हो रहे है|

मोटापे या दुबलेपन की सबसे बड़ी वजह मोबाइल और टेलीविज़न की आदत है| जब बच्चा टीवी और मोबाइल में उलझा रहता है तो उसे भूख का भी एहसास नहीं होता है और वह घंटो तक इसी में उलझे रहते है|

D. शारीरिक गतिविधि में कमी | Disadvantage of Mobile Phones:

मोबाइल और टीवी में इतने मनभावक कार्यक्रम और गेम्स होते है की बच्चा चाह कर भी उनसे दूर नहीं हो पाता| इन कार्यक्रमों के सामने आउटडोर गेम फीके लगते है जिससे बच्चों में शारीरिक गतिविधि बहुत कम देखने को मिलती है|

शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर की मांसपेशियों में हलचल नहीं हो पाती साथ ही साथ स्वच्छ हवा का भी आभाव हो जाता है जिसके फलस्वरूप बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है या बहुत ही कम होता है|

E. शारीरिक मुद्रा पर प्रभाव | Disadvantage of Mobile Phones:

गैजेट्स का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल आपके बच्चों की शारीरिक मुद्रा को प्रभावित कर सकता है| जिस से बच्चों में शारीरिक दर्द की समस्या उत्पन्न होने लगती है| बच्चे कभी गर्दन दर्द, कभी पीठ दर्द तो कभी कमर दर्द की शिकायत करने लगते है| एसा इसलिए होता है क्योंकि गैजेट्स के जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल से बच्चे लगातार एक ही मुद्रा में बेठे या लेटे रहते है|

F. नींद में अनियमितता | Disadvantage of Mobile Phones:

यह साबित हो चूका है की गैजेट्स का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों की नींद पर पड़ता है| जो बच्चे सोने से पहले मोबाइल और टेलीविज़न देखते है वह बच्चे सोने में कठिनाई महसूस करते है| स्क्रीन से आने वाली चमकीली किरणें बच्चों को यह एहसास दिलाती है की अभी रात नही दिन हो रहा है जो एक तरह की मानसिक विकृति है| इस प्रकार बच्चे ठीक से सो नहीं पाते जो उनके दिनचर्या को भी प्रभावित करती है साथ ही साथ बिमारियों को भी जन्म देती है|

Disadvantage of Mobile Phones

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2. मनोवैज्ञानिक प्रभाव | Psychological Effect of Mobile:

सामान्यतया यह देखा गया है की जब बच्चों को टीवी या मोबाइल बंद करने के लिए कहा जाता है तो वह चिडचिडे हो जाते है| एसा इसलिए होता है क्योंकि उनका दिमाग उनको टीवी / मोबाइल को बंद करने से रोकता है| आइये देखते है जरुरत से ज्यादा स्क्रीन जुडाव बच्चों पर और क्या क्या बुरे प्रभाव डालता है|

A. काल्पनिक दुनिया से लगाव | Disadvantage of Mobile Phones:

गैजेट्स के अन्दर की रोमांचक दुनिया वास्तविक दुनिया से भी ज्यादा खुबसूरत लगती है| बच्चे जब इनको देखते है तो वह उस काल्पनिक दुनिया को ही वास्तविक मानने लगते है| इससे मस्तिष्क का विकास एक अलग ही दिशा में होने लगता है| धीरे धीरे बच्चे वास्तविक दुनिया से पूरी तरह दूर हो जाते है जिसके परिणामस्वरूप गंभीर मानसिक विकृतियाँ और बीमारियाँ जन्म लेती है व साथ ही साथ सोचने समझने की शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है|

Disadvantage of Mobile Phones

B. हानि स्वीकार न करना | Disadvantage of Mobile Phones:

मोबाइल फ़ोन पर ज्यादातर खेले जाने वाले गेम बहुत ही आकर्षक और सिंपल होते है जिन्हें बच्चे बड़ी ही आसानी से खेल लेते है| और कभी यदि वो टास्क पूरी करने में असफल हो जाते है तो गेम में मौजूद विकल्प  रीस्टार्ट को दबाकर वापस से पहली वाली पोजीशन पर आ जाते है और उस टास्क को सफलतापूर्वक पूरा कर लेते है|

लेकिन वास्तविक जीवन में होने वाली हानियां दोबारा रीस्टार्ट नहीं की जा सकती और जब उनके सामने एसी कोई परिस्थिति आती है तो वह तनाव ग्रस्त हो जाते है और मानसिक रूप से बीमार महसूस करते है|

C. चिंता एवं अवसाद | Disadvantage of Mobile Phones:

जो बच्चे मोबाइल और टीवी पर अधिक समय व्यतीत करते है वह दुसरे बच्चों से घुलने – मिलने में असहज महसूस करते है तथा अधिक चिंतित और अवसाद ग्रस्त होते है|

D. हिंसक प्रवृत्ति | Disadvantage of Mobile Phones:

जो बच्चे मोबाइल व टीवी पर अधिक हिंसक गेम खेलते है वह उन गेम का ही अनुसरण करने लगते है और अपने आस पास होने वाली घटनाओं को हिंसा की नज़र से ही देखते है|

उदाहरण के लिए जो बच्चा बहुत ज्यादा एक्शन गेम खेलता है वह स्वतः ही काल्पनिक रूप से हाथ पैर मरना, मुक्केबज्ज़ी करना शुरू कर देता है| इसके अलावा वह बच्चा घर पर अपने भाई-बहन, परिवार के सदस्यों व स्कूल में अपने सहपाठियों से लड़ने झगड़ने लगता है| इस से साबित होता है की बच्चे जो कुछ भी देखते है वह खुद को उसी में ढालने की कोशिश करने लगते है|

E. सामाजिक जुडाव में कमी | Disadvantage of Mobile Phones:

अगर टीवी और मोबाइल के सबसे बड़े दुष्प्रभाव के बारे में बात करे तो सामाजिक जुडाव की कमी सबसे ऊपर आती है| यह प्रभाव न सिर्फ बच्चों में अपितु वयस्कों में भी बुरी तरह प्रचलित है| वैज्ञानिक शोधों से पता चला है की मोबाइल, टीवी और लैपटॉप के अधिक इस्तेमाल से आजकल की पीढ़ी के बीच सामाजिक जुडाव बहुत कम हो गया है|

 

अगर आपने इस पुरे आर्टिकल को मन लगाकर पढ़ा है तो आपको यह बात तो अच्छी तरह समझ आ गई होगी की टीवी और मोबाइल ने हमारी ज़िन्दगी को किस तरह से प्रभावित किया है| एक तरफ हमारे दैनिक जीवन में इन गैजेट्स के कई सारे महत्वपूर्ण उपयोग है तो वही दूसरी तरफ हमारी आने वाली नस्लों के लिए हानिकारक साबित हो रहे है| इन गैजेट्स से होने वाली हानि से अपने बच्चों को कैसे बचाया जाये इसके उपाय हम और आपको मिलकर ढूंडने होंगे| अगर आप के दिमाग में कोई उपाय हो तो हमें जरुर बताये हम आने वाले आर्टिकल्स में उसे जरुर शामिल करेगें|

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