Bhagwa Rang vs Chishti Rang | रंगों की गजब कहानी ट्रेंड माफिया की जुबानी

कल मुझे मेरे एक दोस्त ने बताया कि हमारे देश के कुछ इलाकों में रंगों को लेकर तगड़ा कंपटीशन चल रहा है| मैंने उससे पूछा कि भाई यह कैसा कंपटीशन है? तो उसने विस्तार से मुझे इसके पीछे की कहानी बताई: Bhagwa Rang vs Chishti Rang

दरअसल रंगों का यह कंपटीशन दो समुदायों के महान ज्ञानी लोगों के बीच चल रहा है और यह कंपटीशन कोई ऐसा-वैसा कंपटीशन नहीं बल्कि डिजिटल जमाने का कंपटीशन है| यानी कि WhatsApp और Facebook पर चलने वाला कंपटीशन|

Bhagwa Rang vs Chishti Rang

Bhagwa Rang vs Chishti Rang

इसमें आपको करना यह है कि अगर आप हिंदू हैं तो अपने WhatsApp और Facebook अकाउंट पर भगवा रंग की प्रोफाइल पिक्चर के साथ-साथ भगवा रंग वाला वीडियो भी पोस्ट करना है और अगर आप मुस्लिम है तो आपको भी यही काम करना है फर्क सिर्फ इतना है कि भगवा रंग की जगह आपको चिश्ती रंग वाली फोटो और वीडियो पोस्ट करना जरूरी है|

मजे वाली बात यह है कि भगवा रंग और चिश्ती रंग दोनों केसरिया (saffron) रंग के ही दो अलग-अलग नाम है| सच्चाई यह है की धार्मिक  भावनाओं में बुरी तरह से फंसे हुए कुछ कट्टरपंथी लोगों ने इस केसरिया रंग को दो अलग-अलग नाम दे दिए हैं| जिनको ना तो इंसानियत दिखाई देती है और ना ही आपसी सद्भाव| आइए सबसे पहले जानते हैं इन दोनों रंगों के पीछे की कहानी क्या है

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हिंदू समुदाय में भगवा रंग का महत्व | Bhagwa Rang vs Chishti Rang:

केसरिया रंग को त्याग, बलिदान, शुद्धता, ज्ञान एवं सेवा का प्रतीक माना गया है! शिवाजी की सेना के ध्वज, राम, कृष्ण और अर्जुन के रथों के ध्वज का रंग केसरिया ही बताया गया है| यानी कि हिंदू धर्म के लोग केसरिया रंग को अपने वेद-पुराणों और धार्मिक कथाओं से जुड़ा हुआ देखते हैं| सनातन धर्म में केसरिया रंग साधु संतों द्वारा धारण किया जाता है जो अपना घर परिवार और दुनिया से जुड़ी सभी मोह माया को त्याग कर मोक्ष प्राप्ति  के मार्ग पर चलते हैं|

ध्यान देने वाली मुख्य बात यह है कि किसी भी हिंदू साधु-संतों या राजा-महाराजाओं ने कहीं भी इस बात की आधिकारिक घोषणा नहीं की कि केसरिया रंग पर सिर्फ हमारा ही अधिकार है या इस रंग को सिर्फ हम ही इस्तेमाल कर सकते हैं| उनकी नजरों में तो यह सिर्फ एक रंग ही था जिसको पहनकर उन्हें आत्मिक सुख प्राप्त होता था| तो इसका सीधा सा निष्कर्ष यह निकलता है कि केसरिया रंग आत्मिक सुख प्राप्त करने का एक जरिया है जिसे किसी भी धर्म से जोड़ना गलत होगा|

मुस्लिम समुदाय में चिश्ती रंग का महत्व | Bhagwa Rang vs Chishti Rang:

चिश्ती रंग का सीधा संबंध हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा हुआ बताया जाता है| जिन्हें गरीब नवाज भी कहा जाता है| ख्वाजा गरीब नवाज हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी समुदायों के बीच समान रूप से प्रसिद्ध थे सभी धर्मों के लोग उनके अनुयाई थे| वह सभी लोगों को अमन, एकता व शांति का पाठ पढ़ाते थे|

उस काल के सभी धर्मों के कई सारे राजा-महाराजा उनके विचारों से प्रभावित होकर उनके अनुयाई बन गए| इस समय सभी समुदाय के लोग आपस में मिल जुलकर रहते थे और एक दूसरे की आस्थाओं वह धार्मिक भावनाओं की कद्र करते थे चूँकि केसरिया रंग शुद्धता, ज्ञान एवं सेवा का प्रतीक माना गया है वहीं से इस रंग को चिश्ती रंग नाम दिया गया जो कि उन लोगों के लिए था जो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के विचारों का अनुसरण करते थे|

दोनों धर्मों में केसरिया रंग के महत्व को समझने के बाद यह साफ जाहिर होता है कि यह किसी धर्म विशेष का रंग नहीं है| दोनों ही धर्म के साधु-संतों और सूफी संतों द्वारा इस रंग को ज्ञान, सेवा, शुद्धता बलिदान वह आत्मिक सुख का प्रतीक माना गया है|

अब सोचने वाली बात यह है कि जब दोनों समुदाय के देवी देवताओं सूफी संतों और पीर पैगंबरों ने रंगों को लेकर एक दूसरे से कभी भी कंपटीशन नहीं किया तो हम क्यों इस कम्पीटीशन में उलझे पड़े है|

आज के इस युग में इस कंपटीशन को जन्म देने वाले कौन लोग हैं? क्या हम खुद को हमारे देवी-देवताओं और पीर-पैगंबरों से भी ज्यादा ज्ञानी और विद्वान मान चुके हैं|

मैंने दोबारा अपने दोस्त से पूछा कि इस कंपटीशन में जीतने वाले महान ज्ञानी लोगों को क्या मिलेगा? तो वह मुस्कुराया और बोला कि

बचपन में अपने स्कूल में मैंने एक कहानी पढ़ी थी जिसमें दो बंदर एक रोटी के लिए आपस में लड़ रहे थे उनकी लड़ाई का फायदा उठाकर दोनों में रजामंदी कराने के बहाने एक बिल्ली पूरी की पूरी रोटी  खा जाती है| शायद यहां भी कुछ चालाक बिल्लियां अगले साल 2019 में पूरी की पूरी रोटियां खाने की फिराक में है|

वर्तमान माहौल को देखते हुए यह साफ कहा जा सकता है कि भगवा रंग और चिश्ती रंग की आड़ में एक नया ही रंग बनाया जा रहा है और वह रंग है राजनैतिक रंग|

राजनैतिक रंग की सियासत | Bhagwa Rang vs Chishti Rang:

यह कोई नहीं जानता कि इस कंपटीशन की शुरुआत किसने की बस सभी धार्मिक भावनाओं में बहकर इस कंपटीशन का हिस्सा बनते जा रहे हैं| एक बार एकांत में बैठ कर सोचिए इस कंपटीशन में हिस्सा लेकर आपको क्या मिलेगा?

दुर्भाग्यवश अगर यह कंपटीशन किसी भी तरह हिंसक हो गया तो इसमें उन लोगों का बिल्कुल भी नुकसान नहीं होगा जो इस कंपटीशन में आग में घी डालने का काम कर रहे हैं| इसमें सबसे बड़ा नुकसान होगा आपका| या तो कोई मरेगा या समाज में और भी ज्यादा नफरतें बढ़ेगी| इससे राजनीतिक रंग डालने वाले लोगों की ताकत और भी ज्यादा बढ़ेगी| उनका तो काम ही यही है कि फूट डालो और राज करो|

अगर आप सोच रहे हो की इस तरह की धार्मिक भावनाओ में लिप्त हो कर हम भविष्य में खुद के लिए एक विकसित और समृद्ध देश का निर्माण कर लेगे तो आप इस दुनिया के सबसे बड़े मूर्खों की सूची में अपना नाम दर्ज करवा चुके हो|

कोई भी देश या साम्राज्य इस तरह की कट्टरपंथी और अन्धविश्वास भरी विचारधाराओं से विकसित नहीं बनता| अगर एसा होता तो आज हमारा देश विकसित देशों की सूची में सबसे पहले नंबर पर होता|

आज के इस आधुनिक युग में जहां अन्य देश दुगनी रफ्तार से नए-नए आविष्कार करके एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे हैं वही हम लोग अभी तक ऐसे लोगों के चुंगल में फंसे हुए हैं जो हमें और भी ज्यादा कमजोर बनाते जा रहे हैं| हमारी मानसिकता सिकोड़कर इतनी छोटी कर दी गई है कि हमें धर्म के आगे कुछ दिखाई ही नहीं देता|

हमको हर समय सिर्फ धार्मिक भावनाओं में ही उलझा कर रखा जाता है ताकि हम कुर्सी पर बैठे हुक्मरानों से शिक्षा, रोज़गार और तकनीकी विकास का हिसाब न मांग सकें|

जब भी कोई इस तरह की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली चीजें उभरकर सामने आती है उस वक्त हम जरा भी नहीं सोचते कि इसमें कितनी सच्चाई है| बिना कुछ सोचे समझे हम उन चीजों को और भी ज्यादा बढ़ावा देते हैं|

Bhagwa Rang vs Chishti Rang

सिर्फ दूसरे धर्म से अपने धर्म को आगे दिखाने की दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि यह रेस कभी ना कभी तो जरूर खत्म होगी और जब खत्म होगी तो उस वक्त की स्थिति देखने के लिए या तो हम जिंदा नहीं बचेंगे और अगर  बदकिस्मती से जिंदा बच भी गए तो वह स्थिति देखकर अपने आप ही मर जाएंगे|

इस पोस्ट को लिखने के पीछे हमारा मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं है|  हम सिर्फ आपको यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि धार्मिक भावनाओं में आकर कोई भी ऐसा कदम ना उठाएं जिससे आपके आपसी रिश्तो में कड़वाहट भर जाए|

यह रंगों का खेल एक सोची-समझी चाल है धर्म के नाम पर एक दूसरे को उकसाकर गंदी राजनीति की जा रही है| अगले वर्ष होने वाले चुनाव को देखते हुए वोटों के ध्रुवीकरण का खेल  शुरू हो चुका हैं| इस खेल के प्यादे आप हो और जो इस खेल का वजीर है वह अपने आलीशान बंगले में बैठकर इस पूरे खेल का मज़ा ले रहा है|

जब यह खेल खत्म होगा तो वजीर के लिए रोटियां सिक चुकी होंगी और आपके हाथ में होगा सिर्फ बाबा जी का ठुल्लू| फिर अगले पांच साल बाद यही कहानी दोहराई जाएगी|

इसलिए अब भी समय है जाग जाओ| इस तरह की गतिविधियों से दूर ही रहो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी ऐसी गतिविधियों से दूर रहने के लिए प्रेरित करो| अगर यह पोस्ट किसी भी मायने में आपको थोड़ी भी अच्छी लगी हो तो मेहरबानी कर के इसे अपने फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और एक ख़ुशहाल व समृद्ध भारत बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाएं|

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