प्राइवेट से सरकारी स्कूल में लिया दाखिला, फिर भी बन गई स्टेट टोपर

 

यह कहावत तो आप सबने सुनी होगी “जहां चाह वहां राह”  दिल में अगर कुछ करने की लगन हो और इरादों में भरपूर हौसला हो तो कुछ भी पाया जा सकता है|

ऐसा ही एक उदाहरण बनी है हरियाणा की अनु राठौड़ जिन्होंने कक्षा बारहवीं के परीक्षा परिणाम में पूरे हरियाणा में चौथी वरीयता प्राप्त की है और कला संकाय में पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है|

Anu Rathore Hariyana State Topper

अनु की इस उपलब्धि में है खास बात:

अब आप यह सोच रहे होंगे कि इसमें खास बात क्या है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अनु ने यह उपलब्धि एक सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए हासिल की है|

12वीं क्लास से पहले यानी कि 1 साल पहले अनु एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करती थी उस स्कूल को छोड़ अनु राठौड़ ने इस साल उनके ही गांव के सरकारी स्कूल की 12वीं कक्षा में दाखिला लिया था|

अनु का ग्रामीण परिदृश्य:

मिडिल क्लास फैमिली से संबंध रखने वाली 17 वर्षीय अनु राठौड़  हरियाणा के छोटे से गांव कसान में रहती है जो गुरुग्राम जिले के मानेसर तहसील में आता है| उनके गांव की कुल जनसंख्या सिर्फ 9000 है|

अनु के अनुसार उनके गांव में सिर्फ एक ही सरकारी स्कूल है और  पढ़ाई के लिए  अनु प्राइवेट स्कूल से ज्यादा सरकारी स्कूल को महत्व देती हैं| वह  कहती है की

 मेरे गांव में सिर्फ एक ही सरकारी स्कूल है बाकी जितने भी स्कूल हैं वह सभी प्राइवेट हैं मैंने सरकारी स्कूल इसलिए चुना क्योंकि इससे पहले मैं जिस प्राइवेट स्कूल में पढ़ती थी मुझे वहां का  पढ़ाई का स्तर पसंद नहीं आया जब मैं वह स्कूल छोड़ रही थी तो आसपास के सभी  लोगों ने मुझसे कहा कि इस स्कूल में बहुत ही अच्छे अध्यापक हैं  यहां का पढ़ाई का स्तर  काफी उच्च है लेकिन मैंने किसी की बात नहीं सुनी|  हैरानी की बात यह है कि मेरे घरवाले भी मुझे प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ाना चाहते थे|

अपनी इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय की बदौलत ही अनु ने बाहरवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में  500 में से 484 अंक प्राप्त कर 97 प्रतिशत के साथ  पूरे हरियाणा राज्य में चौथा स्थान प्राप्त किया| और साथ ही साथ कला संकाय में पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया|

अनु के दो भाई भी हैं और वह दोनों प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ते हैं जिस  सरकारी स्कूल में अनु पढ़ती हैं उसमें लगभग 1000 विद्यार्थी हैं|

Anu Rathore with her School Staff

Anu Rathore with her School Staff

प्राइवेट स्कूल V/S सरकारी स्कूल:

जब उनसे पूछा गया कि आपने सरकारी स्कूल में पढ़ने का  ही निर्णय क्यों लिया तो  इसकी मुख्य वजह वह प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में बहुत बड़े अंतर को बताती है| अन्नू के अनुसार सरकारी और प्राइवेट स्कूल में सबसे बड़ा अंतर अध्यापकों का अनुभव और उनका पढ़ाने का तरीका है| प्राइवेट स्कूलों में अध्यापक ज्यादातर बदलते रहते हैं जिन्हें विषयों का इतना ज्ञान नहीं होता है| अनु आगे बताती है कि

मैं शुरुआत में इकोनॉमिक विषय में बहुत कमजोर थी भाग्यवश जिस सरकारी स्कूल में मैंने दाखिला लिया उसमें इकनोमिक विषय पढ़ने वाली एक अध्यापिका नई नई आई थी उन्होंने संबंधित विषय में मेरी खूब मदद की| स्कूल में  विषयों का  संपूर्ण ज्ञान लेने के लिए मैं इंटरनेट का भी इस्तेमाल करती थी| अब इकोनॉमिक्स मेरा सबसे पसंदीदा और मजबूत विषय है|

माता-पिता की जागरूक सोच:

अनु के पापा ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करते हैं और उनकी मां  ग्रहणी है| सरकारी स्कूल के साथ-साथ अनु राठौड़ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को भी दिया| वार्तालाप को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता ने कभी भी मेरी पढ़ाई को लेकर कोई  विशेष मांग नहीं की |

Anu Rathore With her Family

Anu Rathore With her Family

भविष्य की तैयारी:

अनु से जब भविष्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके भूगोल की प्रोफेसर श्रीमती प्रीती की  तरह ही वह भी भविष्य में इंग्लिश प्रोफेसर बनना चाहती है इसके लिए वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश विषय की पढ़ाई करने की इच्छुक है|

अपने भूगोल की प्रोफेसर की तारीफ करते हुए अनु कहती है कि उनका पढ़ाने का तरीका वाकई में प्रशंसनीय है| वह रोजाना गुरूग्राम से मेरे गांव कसान का लंबा सफर तय करती है और कभी भी हमें पढ़ाने का मौका नहीं छोड़ती|

अनु के अनुसार उनके स्कूल में  स्वच्छता का  मुख्य रुप से ध्यान रखा जाता है|  उनके स्कूल में पढ़ाई से संबंधित सारी सुविधाएं उपलब्ध है जिनमें कंप्यूटर लैब के साथ-साथ एक बड़ी  पुस्तकालय मुख्य  है|

महिला सशक्तिकरण का असर:

अनु अपने खाली समय में सिर्फ पढ़ाई को ही महत्व देती हैं उनको कविताएं पढ़ने का भी शौक है| वह यह बात मानती है कि युवाओं मुख्य रूप से महिलाओं के लिए अपनी जिंदगी बदलने का सबसे बड़ा हथियार सिर्फ शिक्षा ही है शिक्षा के बलबूते पर कुछ भी किया जा सकता है| अनु कहती है

मैं जिस ग्रामीण इलाके में रहती हूँ वहां की ज्यादातर महिलाएं शिक्षित नहीं है| शिक्षा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की शक्ति देती है अगर महिलाएं शिक्षित नहीं होंगी तो उनको दूसरों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा वह अपनी इच्छा से कुछ नहीं कर सकती|

वर्तमान में हमारे देश में महिला सशक्तिकरण को लेकर लोगों में काफी जागरूकता देखने को मिली है और इसका असर मेरे गाँव पर भी हुआ है| अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अनु कहती है की

मैंने अगर इस परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है तो उसके पीछे की वजह मेरे गाँव में लड़कियों को मिलने वाली प्रेरणा ही है| एक बार जब में कॉलेज पहुच जाऊँगी तो मैं एक मिसाल की तरह काम करुँगी और लोगो को शिक्षा की शक्ति दिखाउंगी|

यह कहानी है हरियाणा की अनु राठौड़ की जिन्होंने पढने की मज़बूत लगन और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते पूरे देश में अपना और अपने गाँव का नाम रोशन किया है आज पूरा देश उनके इस जज्बे को सलाम कर रहा है| अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है की हम अनु राठोड़ की इस महान उपलब्धि को हर घर तक पहुचाएं और अपने सभी मिलने वालों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें|

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